तुम
जब सावन की पहली बारिश में, तुम तनहा तनहा भीगोगे
उन बूंदों की रिमझिम में तुम, तब याद हमें भी कर लेना
जब यादों के सोये गुलशन में, कुछ बिखरी कलियाँ चट्केंगी
तुम यादों की दीवाली में, गुलशन से कलियाँ चुन लेना
जब शहर-ए दिल की गलियों में, फैली होगी तारीकी सी
तब ऐसे में उन गलियों को, तुम जगमग रोशन कर देना
जब काली स्याह रातों में, आँखें नम होती जायेंगी
उन रातों की स्याही को तुम, तब उजियारों से भर देना
जब यादों की मौसीकी पर, लहरें कुछ धुन सी बनायेंगी
उन लम्हों की तन्हाई में, हमराह हमें भी कर लेना
तुम याद हमें भी कर लेना
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