सुरमई सी रात है, हवा में बसी मालती
है बेले की नयी सुगंध, रजनीगंधा की लता हिली
कहीं गुलाब की महक, गुलमोहर की चटकी कली
महक उठी है आज वादी-ऐ-दिल की हर गली गली
वो चाँद आसमाँ से क्यों मुझे हैं यूँ पुकारता
ये किसकी धड़कनों की लै पे दिल मेरा है गाता
ये कौन दिल के तारों को है छुप के छेड़ जाता
बहक रही हूँ मैं यहाँ कैसी है ये बेकली
हवा में उसकी आहटें बेचैन कर रही हैं यूँ
वो जैसे दिल के पास है महसूस हो रहा है क्यों
मैं जानती नहीं उसे मगर है मेरे साथ वो
तड़प रही हूँ रात दिन है कैसी मेरी बेबसी
है बेले की नयी सुगंध, रजनीगंधा की लता हिली
कहीं गुलाब की महक, गुलमोहर की चटकी कली
महक उठी है आज वादी-ऐ-दिल की हर गली गली
वो चाँद आसमाँ से क्यों मुझे हैं यूँ पुकारता
ये किसकी धड़कनों की लै पे दिल मेरा है गाता
ये कौन दिल के तारों को है छुप के छेड़ जाता
बहक रही हूँ मैं यहाँ कैसी है ये बेकली
हवा में उसकी आहटें बेचैन कर रही हैं यूँ
वो जैसे दिल के पास है महसूस हो रहा है क्यों
मैं जानती नहीं उसे मगर है मेरे साथ वो
तड़प रही हूँ रात दिन है कैसी मेरी बेबसी