Sunday, February 28, 2021

पी का रंग

मोहे रंग चढा़, पी का रंग चढा़
देखो रे देखो कैसा ये रंग चढा़

पी के रंग में ऐसे रंगी मैं, भीज गया मेरा तन मन
मैं बन बैठी बावरी रे, भूली रे देखन दरपन
मोहे रंग चढा़

सजना आए द्वारे मेरे, मैं बन बैठी जोगन
भूल गयी रे सब कुछ मैं तो, खो बैठी हूँ चितवन
मोहे रंग चढा़

पी से मिलन को मैं यूँ निकली, भीजी रे मेरी चुनरिया
लोक लाज का लोभ नहीं अब, पीछे छूटीं सखियाँ
मोहे रंग चढा़