नशे में डूबी हुई निगाहें,
सुहानी मीठी वफ़ा की राहें
हमें भी तब ये खबर कहाँ थी
बुला रही थीं किसी की राहें
कोई था जैसे हवा का झोंका
महकती खुशबू में बस रहा सा
नज़र में थी वो बला की शोखी
क़दम न जैसे संभल रहा था
कुछ ऐसी थी वो ग़ज़ब की हस्ती
की हुस्न-ए यूसुफ खुद आ खड़ा हो
खुमार ऐसा था कुछ नज़र में
धड़कता दिल भी निकल पड़ा हो
वो होंठ मस्ती में मुस्कुराये
बहारों का दिल मचल गया क्यों
सुलगती साँसों की आहटों से
हवाओं का रुख बदल गया क्यों
वो था एक झोंका खुली हवा का
नज़र मिला कर यूँ छुप गया वो
बन एक शम्मा सा झिलमिलाया
दिल को उमंगों से भर गया वो
इन आँखों में है अब खुमार उनका
ढूंढें नज़र उनको हज़ारों में है
वो है अनोखा कुछ इस तरह से
की जैसे चंदा सितारों में है
2 comments:
Very nice Bee nish ji.. keep it up
thanks sanjeev ji, bahot dino ke baad kuchh likha hai
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