Friday, March 23, 2012

चाहत

सोचा था कभी ख्यालों में
जाने चाहत क्या होती है
ये रंगबिरंगी दुनिया भी 
चाहत के दम पर जीती है

क्यों नदियाँ गहरे सागर से
खुश होकर मिलने जाती हैं
क्यों बारिश के ख्यालों में खोयी
सीपें मुंह खोल के सोती हैं

जब पंख नहीं हो चिड़ियों के
आकाश उन्हें क्यों भाता है
पंखों के साथ तो अपना वो
जीवन आकाश में जीती हैं 

कभी देख के कुछ तस्वीरों को
क्यों आँखें सपने बुनती हैं
जाने अनजान से चहरों को
क्यों धड़कन दिल में समोती है

कभी शोख नज़र हो जाती है
कभी शामो सहर बन जाती है
यादें भी अपने गुलशन में
क्या क्या तस्वीर संजोती है

कभी भूल भी अच्छी लगती है
कभी दर्द भी ठन्डे लगते हैं
जाने अनजान सी यादें भी
क्यों आँखें नम कर जाती है
       

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